मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

कुछ सपनों के मर जाने से

छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।

सपना क्या है, नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों
कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है।

माला बिखर गयी तो क्या है
खुद ही हल हो गयी समस्या
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई तपस्या
रूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालों
कुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है।

हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: कुछ सपनों के मर जाने से / गोपालदास 'नीरज'

हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: कुछ सपनों के मर जाने से / गोपालदास 'नीरज'

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

राष्ट्र के #नवनिर्माण में अपनी #भूमिका निभा सके।

दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से निजात दिलाने के सूत्र दे सकने में पूर्णतः सक्षम #भील समाज की प्राचीन और आजमायी हुई महान परम्परा #हलमा , जिसे #शिवगंगा ने सम्पूर्ण क्षेत्र में बहुत ही साकार रूप सहित समाजहित में धरातल पर विगत लगभग एक दशक में ठोस रूप में पुनर्स्थापित कर दिखाया हैं।

#हलमा का कार्य देखने , समझने और अपनाने की सदईच्छा रख देश के हर कोने से तकनीकी विशेषज्ञ , पर्यावरणविद , न्यायविद और विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवी नियमित रूप से झाबुआ आने लगे हैं।यूँ तो #आदिवासी बहुल #झाबुआ और #आलीराजपुर जिले में वर्षभर शिवगंगा की गतिविधियाँ संचालित होती हैं लेकिन जिला मुख्यालय झाबुआ पर होने वाला सालाना #हलमा आयोजन आज 16 और कल 17 फरवरी 2018 को कुछ खास सन्देश देता नज़र आता हैं।आज निकली गैती यात्रा में हजारो की संख्या में बच्चे , किशोर , युवा और वृद्ध महिला पुरुष जब नगर के मुख्य मार्गो से गुजरे तो लगभग प्रत्येक हाथों में परमार्थ की भावना से प्रेरित गैती - फावड़ा और तगारी थे। जो नगरवासियों का आह्वान करते नज़र आए। जिले भर से एकत्रित यह हजारो हाथ अपने गाढ़े पसीने की कमाई खर्चकर बिना किसी लालच या लाभ की आशा के बिना परमार्थ की भावना से सराबोर हो एकत्रित हुए। जो झाबुआ नगरवासियों के लाभ के लिए नगर से सटी हाथीपावा की टेकरियों पर सतत 3 - 4 घण्टे #श्रमदान से अपना पसीना बहाकर जल संचय की हजारो जल संरचनाएं बनाकर सौगात प्रतिवर्ष देते हैं।जो करोड़ो लीटर जल भूमि में संचित कर नगर के भूजल स्तर को बढाने में अहम भूमिका निभाने लगा है।आज निकली गैती यात्रा का नेतृत्व महामंडलेश्वर संत श्री प्रणवानन्द जी महाराज , आदिवासी सन्त श्री कानू जी महाराज , पूरे विश्व मे भारत माता की आरती सहित अपनी कला के माध्यम से भारतीय धर्म-संस्कृति की ध्वजा लहराने वाले अंतर्राष्ट्रीय कलाकार किन्तु ठेठ देशी सहज व्यक्तित्व बाबा सत्यनारायण मौर्य ने किया। कुछ वर्ष पूर्व दो - दो की पंक्ति बनाकर निकलने वाली गैती यात्रा का इस बार का स्वरूप इतना वृहद रहा कि बहुत लम्बी दूरी तक सड़कों की सम्पूर्ण चौड़ाई चलने के लिए कम पड़ती नज़र आ रही थी। यह परमार्थ की भावना #शिवगंगा के माध्यम से बहुत वृहद रूप में तेजी से विस्तारित होती जा रही हैं। इसके स्पष्ट प्रमाण गैती यात्रा के बाद कॉलेज मैदान पर आयोजित धर्म सभा मे दिखाई दिए।यहाँ विद्वजनों ने देश के विभिन्न कॉलेजो और #IIT संस्थानों से आए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि देशभर में आप जहाँ भी जाए अपने - अपने कर्म क्षेत्र में #शिवगंगा का यह संदेश ना केवल प्रसारित करे बल्कि इस #हलमा संस्कृति को वहाँ धरातल पर समृद्ध रूप देकर आपके यहाँ आने को सार्थकता प्रदान करे।उन्होंने #हलमा को एक त्यौहार बनाने का आह्वान तक कर दिया ताकि यह देश की #संस्कृति में #परमार्थ #समृद्धि के सूत्र संचारित कर #राष्ट्र के #नवनिर्माण में अपनी #भूमिका निभा सके।