कल चैत्र शुक्लनवमीं, १४/०४/२०१६ दशरथ के घर अयोध्या में राम का जन्म दिन था। राम के जीवन के अनेकों प्रेरक प्रसंग हैं। एक से अधिक विवाह व्यक्ति के जीवन में ईर्ष्या, वैमनस्य को जन्म देते हैं। राम के जीवन में भी ऐसा ही हुआ।
उन्हें वनवास हुआ। राम ने बिना आनाकानी किये कैकेयी के प्रस्ताव और पिता की आज्ञा को शिरोधार्य किया। घर टूटने से बचाने का उनका दृष्टिकोण बे-जोड़ रहा।
जब भरत राम से मिलने आये तो लक्ष्मन के मन में भरत के प्रति बहुत अधिक क्षोभ था। लक्ष्मण ने भरत से युद्ध करने का विचार राम के सामने रखा। राम ने लक्ष्मण के प्रस्ताव को अमान्य कर दिया। भरत और लक्ष्मण के बीच की खाई को दूर किया।
लक्ष्मण के कहने पर ही राम भरत से चित्रकूट में मिले। लक्ष्मण
के मन में भरत के प्रति संदेह था, राम ने लक्ष्मण को समझाया कि भरत कैकेयी के विचारों से कोई मेल नहीं है भरत निष्कपट हैं। दो भाइयों के बीच की संदेहात्मक खाई को दूर करने का राम का तरीका अद्भुत एवं अनुपम सिद्ध हुआ।
इन्द्र-पुत्र जयन्त को राम ने सख्त सजा दी और अय्याशी में पले-बढ़े, बिगड़े राजकुमारों की अनर्गल हरकतों पर जबरदस्त लगाम कस दी थी।
राम ने भयभीत समाज को निर्भय बनाया। आज की भाषा में कहा जाये तो कहा जायेगा कि राम ने जंल में निवास रत लोगों के हक की लड़ाई लड़ी। स्त्रियों के प्रति दुर्व्वहार करनेवालों को राम ने कभी नहीं बख्शा चाहे वह व्यक्ति तब का अवध्य ब्राह्मणही क्यों न हो।
चौदह वर्ष के वनवास में लक्ष्मण और सीता के बीच भी खाई पैदा हो गई थी और राम ने लक्ष्मण के पक्ष को जान कर उस विषय को सदा सदा के लिये समाप्त किया।
उन्हें वनवास हुआ। राम ने बिना आनाकानी किये कैकेयी के प्रस्ताव और पिता की आज्ञा को शिरोधार्य किया। घर टूटने से बचाने का उनका दृष्टिकोण बे-जोड़ रहा।
जब भरत राम से मिलने आये तो लक्ष्मन के मन में भरत के प्रति बहुत अधिक क्षोभ था। लक्ष्मण ने भरत से युद्ध करने का विचार राम के सामने रखा। राम ने लक्ष्मण के प्रस्ताव को अमान्य कर दिया। भरत और लक्ष्मण के बीच की खाई को दूर किया।
लक्ष्मण के कहने पर ही राम भरत से चित्रकूट में मिले। लक्ष्मण
के मन में भरत के प्रति संदेह था, राम ने लक्ष्मण को समझाया कि भरत कैकेयी के विचारों से कोई मेल नहीं है भरत निष्कपट हैं। दो भाइयों के बीच की संदेहात्मक खाई को दूर करने का राम का तरीका अद्भुत एवं अनुपम सिद्ध हुआ।
इन्द्र-पुत्र जयन्त को राम ने सख्त सजा दी और अय्याशी में पले-बढ़े, बिगड़े राजकुमारों की अनर्गल हरकतों पर जबरदस्त लगाम कस दी थी।
राम ने भयभीत समाज को निर्भय बनाया। आज की भाषा में कहा जाये तो कहा जायेगा कि राम ने जंल में निवास रत लोगों के हक की लड़ाई लड़ी। स्त्रियों के प्रति दुर्व्वहार करनेवालों को राम ने कभी नहीं बख्शा चाहे वह व्यक्ति तब का अवध्य ब्राह्मणही क्यों न हो।
चौदह वर्ष के वनवास में लक्ष्मण और सीता के बीच भी खाई पैदा हो गई थी और राम ने लक्ष्मण के पक्ष को जान कर उस विषय को सदा सदा के लिये समाप्त किया।
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