इस्लाम को जानिये – ६
पिछली पोस्ट का अंत इस प्रश्न के साथ हुआ था कि –
१ कुरान को फिर ठीक प्रकार से कैसे समझा जाए ?
कुरान को ठीक प्रकार से समझने के लिये मुहम्मद पैगंबर के जीवन की ओर दृष्टि डालना होगी क्योंकि इस्लाम में जितना महत्वपूर्ण स्थान कुरान का है, उतना ही महत्वपूर्ण स्थान पैगम्बर मोहम्मद के जीवन का भी है| पैगम्बर मोहम्मद ने अपने जीवन में जो भी किया वो अल्लाह के सन्देश के अनुसार ही किया| इसलिए पैगम्बर मोहम्मद का जीवन कुरान में कही गई बातों का जीवंत रूप है |
पैगम्बर मोहम्मद के जीवन के बारे में अत्यंत विस्तार से मुस्लिम विद्वानों द्वारा लिखा गया है | पैगम्बर मोहम्मद के जीवन के बारे में या उनके द्वारा किये गए कार्यों के बारे में सम्पूर्ण मुस्लिम जगत में कोई असहमति नहीं है| पैगम्बर का जीवनचरित्र सम्पूर्ण मुस्लिम जगत के लिए अनुकरणीय है, ऐसा इस्लाम का मानना है|
कुरान को अल्लाह द्वारा भेजा गया है, इस कारण से कुरान की पवित्रता एवं प्रामाणिकता मुस्लिमों की दृष्टि में विवाद से परे है| पैगम्बर मोहम्मद का जीवन कुरान के अनुसार होने से उनकी हरेक उक्ति तथा कृति मुस्लिमों के लिए अनुकरणीय है| इस्लाम का मत यह है कि उनका आचरण , बोल-चाल आदि अल्लाह की इच्छा, प्रेरणा तथा मार्गदर्शन के कारण ही हुआ है | यही कारण है कि मुहम्मद पैगंबर को जानने के बाद कुरान को समझना कुछ आसान होगा
पैगम्बर मोहम्मद की दो महत्त्वपूर्ण बातें- उक्ति और कृति हैं। दोनों का विवरण देने वाले ग्रन्थ को ‘अल – हदीस‘ कहा जाता है| यही कारण है कि कुरान में दिए गए किसी सन्देश के बारे में यदि स्पष्टीकरण न हो या और अधिक विस्तार से समझना हो तो ‘अल-हदीस’ का सहारा लेना पड़ता है | गैर मुस्लिमों के लिए सभवतः ‘अल-हदीस’ नया शब्द हो, लेकिन मुस्लिमों के आचरण एवं व्यवहार को निर्धारित करने में इसका बड़ा योगदान है |
इसका सीधा सा अर्थ है कि , किसी विषय के सम्बन्ध में पैगम्बर मोहम्मद ने अपने जीवन में क्या किया था यह मुस्लिमों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, भले ही ऐसा कोई निर्णय आज की परिस्थिति में करना हो | यही कारण है की १४०० वर्ष बीत जाने के बाद भी ‘कुरान’ और ‘अल- हदीस’ मुस्लिमों के लिए उतने ही प्रासंगिक है जितने वे १४०० वर्ष पूर्व थे। यह बात कि समय बदलता है, तो संदर्भ भी बदलते हैं। फिर भी आचरणगत निर्णय लेने के लिये समय के साथ किसी भी नए बदलाव या परिवर्तन की इजाजत इस्लाम नहीं देता। अल हदीस में यह सब मिलता है। पर गैर मुस्लिमों केलिये अल हदीस नया शब्द है। जिन्होंने अल हदीस के विषय में जाना नहीं वह कुरान की बातें करें, शोभा नहीं देता।
प्रश्न यह उठता है कि –
१ क्या ‘हदीस’ भी ‘कुरान’ की तरह ही महत्वपूर्ण है ?
............................................क्रमशः
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