रवीश जी बहुत अच्छा लिखने के लिये बधाई, आप बोलते भी अच्छा हैं और लिखते भी अच्छा हैं परन्तु क्या अभी आपने जो लिखा वह सही लिखा, नहीं वह सही नहीं है। हत्या पर कोई जश्न नहीं मना रहा है, हत्या पर सदैव राजनैतिक रोटी सेकते हैं उनका मखोल जरूर उड़ाया ज रहा है, मखौल आपका भी उड़ रहा है क्योंकि आप भी पक्षपात भरी बातें करने के, उन्हें जायज ठहराने के, मासूमियत भरी बातें कहने उसपंथी कुनवे के मुख्य किरदार हैं। यह कोई बुरी बात नहीं है, आप भी अपनी विचारधारा रख सकते हैं। आप मासूम से सबाल खड़े करते इस पत्र में आपने माँ बाप को सचेत करने का काम किया, यह काम आप करना ही चाहिये पर यह भी ध्यान रखिये दूसरे भी माँ बाप से अपने बच्चों के लिये संदेश दे ही रहे होंगे। दोनों के संदेश लेने के बाद निर्णय तो माँ बाप को है, उनके निर्णय को विनम्रता से स्वीकार करने का आपका मन होना चाहिए, अभी आपके अन्दर वह उँचाई आना बाकी है। आपकी एक फेंक आइडी देखी आपके हवाले से उसमे लिखा कि मैं दुखी हूँ क्योंकि मेरा प्रधानमंत्री गुण्डा है, वह आपकी आइडी नहीं ही होगी पर लोग समझने तो यह भी गये कि रवीश कुमार भी पिछले तीन साल नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से अपना आपा खोते जा रहे हैं, आप आपा भी इन्शान हैं आपा खो सकते हैं पर लोग आप से यह अपेक्षा रखते हैं कि आप उनके आदर्श बने रहैं। आनावाला समय आपके लिये असहनीय ही रहेगा क्योंकि 1920 से जब से भारत में कम्युनिस्ट पार्टी गठित हुई भारतीय संस्कृति पर एक तरफा प्रहार चल रहा है, क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। गोधरा होगा तो अहमादाबाद की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। केरल की नृशंस हत्यायें कभी आपकी अपील का कारण नहीं बनी और न कभी बनेंगीं। हत्या के बाद की करुणा को आपने पहले मारा खूब मारा, इस हत्या में कह नहीं सकते किसका हाथ है पर आपने बिना जाँच के फैसला देनेवालों की हौसला अफजाई में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी। माओवादी हिन्सा में ही विश्वास रखते हैं पर भारतीय चेतना जिसे हिन्दुत्त्व भी कहते हैं शान्तिप्रिय है। आप जिस कुनवे से संबंधित हैं वह हिंसा करते हुये अभी तक अहिंसक बने रहने में सफल रहा पर अब उस दरिंदगी भरे चेहरे से पर्दा उठ गया है। भारत में नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बीजेपी और संघ के कारण नहीं हैं, आप जैसे एक तरफा भारतीय संस्कृति का चीर हरण करते रहे उस कारण है। एक दिन तो ऐसा आना ही था जब कंस की जेल के प्रहरी सो गये, कृष्ण को मथुरवासियों ने बचा लिया था। आजादी के बाद के इन सालों में भारतीय सं्स्कृति के साथ जो बलात्कार आपके विचारसमूह ने किये, उसकी परिणिति से हिन्दुत्त्व का उभार हुआ है। समय साक्षी है। समय सब देख रहा है।
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