शनिवार, 16 जुलाई 2016

भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, रुड़की

भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, रुड़की के बीस छात्र शैक्षणिक भ्रमण पर झाबुआ में कल 16/07/2016 प्रात: 9-30 पर शिवगंगा आश्रम मेघनगर में पहँचे । अपराह्न 11-30 बजे चार समूहों में चार दिशाओं अलग अलग गाँव में जाने के केलिये निकले। एक समूह थाँदला,  एक मेघनगर,  एक झाबुआ,  एक राणापुर तहसील में पहुँचा।
 राणापुर। के समूह के साथ कुछ समय में भी रहा। गाँवों में तकनीकि का का स्वरूप कैसा है? यह प्रश्न समूह के सभी पाँचों छात्रों के मन में था।




हम गुलाबपुरा में गाँव में जाकर रहे थे तभी एक किसान खेती में दवाई का छिड़ काव्य करता दिख गया। किसान की पत्नी के हाथ में एक फ्रेम पर सीमेंट की बोरी को उधेड़ कर निकाला गया कपड़ा फ्रेम पर सिलाई करके कसा हुआ था।
मूमफली और ज्वार की मिश्रित खेती
हम सभी उससे यह जानने पहुँचे कि तुम्हारी पत्नि इस पर्दे से क्या कर रहीं हैं?

युवा किसान ने बताया कि इस दवा से ज्वार मर जाती है, मूमफली का दवा का कोई असर नहीं होता। खेत में चारा बहुत हो गया है, चारे को मारने की दवा है।
ज्वार के ऊपर दवा न गिरे, इसलिये हमने यह कपड़े को लकड़ी की फ्रेम पर कसे दिया है, इससे यह दवा ज्वार के पौधों पर नहीं गिर पाती।

गाँव में सरलता से बननेवाले यह टैक्नोलॉजी का उदाहरण है।

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